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Thursday, March 26, 2020

EK CHOTI SI SHARARAT





नमस्ते दोस्तों कैसे हैं आप उम्मीद है सुरक्षित हैं ना !आप सब लोग अच्छे से अपना ध्यान  रख  रहे हैं हैं ना ?न जाने क्या चल रहा है पूरा विश्व जाने किस  कम्बख़्त CORONA  नाम के ख़तरे से जूझ रहा है। भाई मैं तो काफ़ी  डर  रही हूँ न जाने क्या होगा ,कैसा होगा कल का दिन, न जाने क्या ख़बर  सुनने को मिलेगी ऊपर से LOCKDOWN , मतलब सोने पे सुहागा। भई  हम औरतें तो अच्छे से वाकिफ़ हैं इस लॉक वाली तकलीफ से ,आप भाई लोग बताओ ?कैसा लग रहा है घर मैं कैद होना ,मज़ा है या सज़ा हैं ? चलो ख़ैर  वक़्त  की बुरी मार तो पहले ही चल रही है मैं आप लोगों को और परेशान  नहीं करना चाहती। 
बस एक विनती है कि  इस समस्या को हल्के  मे न लेते हुए सरकार के साथ  कदम से कदम मिलाकर  ऐसे ही चलते रहिये। मुझे पूरा विश्वास  है जीत हमारी ही होगी।  और अब कुछ हल्का फुल्का हंसी मज़ाक हो जाये। आखिरआपको भी मेरी तरह समय गुज़ारने के लिए  कुछ न कुछ नए -नए हथकंडे  ढूंढ़ने पड़ रहे होंगे। 
 तो हुआ यूँ कि आज  मैं ऐसे ही अपनी कुछ पुरानी  PHOTO एल्बम निकाल के देख रही थी ,मेरी एक बचपन की फोटो मिली जिसमें मैंने रेड कलर के रिबन  लगा के दो -दो  चोटी बनायीं हैं। अभी तो एक के लिए भी बाल काम पड़ते हैं। .हहहा 🤣. फोटो के ऊपर  स्केच पेन से  बड़ा -बड़ा "तितली" लिखा हुआ है। मुझे ज़्यादा   देर नहीं लगी उस घटना  को याद करने में जब मेरा नाम तितली पड़ा था। 

तो जनाब हुआ यूँ की एक बार मम्मी - पापा किसी काम के सिलसिले मैं मुझे (आफत की पुड़िया को )  घर में अकेला छोड़  के चले गए। बहुत सारी चेतावनी देकर ,ऐसा नहीं की मैं  बिल्कुल  अकेली थी ,छोटी बहन और उससे छोटा भाई भी था। उस ज़माने में न्यूक्लियस  परिवार का प्रचलन तो था नहीं , सब लोग साथ रहा करते थे। कभी कभी तो गिनती करना भी मुश्किल हो जाता था कि  कितने लोगो का खाना बनेगा। 😄.... 

हाँ तो मैंने कुछ नयी खुराफ़ात  करने की सोची।  सोचा कि   आज़ादी को  बेकार  थोड़े   ही जाने दिया जा सकता है। उन दिनों बसंत ((SPRING) का मौसम था, घर के सामने खूब रंग बिरंगी तितलियाँ मँडराया  करती थी  ,बड़ा लुभावना रंग -रूप था उनका।  उनको पकड़ने के लिए उनके  पीछे -पीछे  तो मैं बहुत दिनों से डोला करती थी ,आज सोचा कि  क्यों ना उनके साथ ही उड़ने का प्रयास किया जाये। ..! हैरान हो गए न आप !

पर शायद बच्चोँ  के कल्पनिक मन के लिए ये  कोई बड़ी बात नहीं। .. हैं न बच्चो ? 😇

अब बारी थी  कल्पना को सच करने की," कि कैसे तितलियों की तरह उडा  जाये।।।  बहुत दिमाग़  लगा कर कुछ काग़ज  के रंग -बिरंगे पंख के आकार के काग़ज  काटे ,और उनको गत्ते पर चिपका दिया ,जितना भी गोंद  था सारा का सारा उड़ेल दिया था। आख़िर गिरने और मरने की भी तो फ़िक्र थी भई ! अब बारी थी कि कैसे शरीर जोड़ा जाये। बहुत सोचने के पश्चात् एक युक्ति ( TRICK )सूझी,फिर क्या था, सारी   तैयारी  पूरी कर मैं जा बैठी सबसे ऊँचे नीम के पेड़ पर जिसका तना थोड़ा झुका हुआ था। उस पेड़ पर चढ़ना मेरे बाएं हाथ का  खेल था। थोड़ी सी दिक़्क़त तो हुई, क्यूंकि मेरे ऊपर इतने सारे  बोरी  सिलने वाले धागे जो बंधे थे जो मेरे पंखों को सहारा दिए हुए थे. 

 मन में उड़ने की ख़ुशी इतनी थी की पूछो मत ,अब  बस गहरी साँस भर आँखों को मैंने बंद करके जो छलाँग लगाई रंगबिरंगी तितलियाँ ही थोड़ी देर बाद नजर सी आयी। 😇😆💫

आँखों के आगे अँधेरा सा छाया और मन में बस एक ही ख्याल  आया ? क्या ये सपना था या सच में मैं  ज़्यादा  ऊँची उड़ गयी हूँ आसमान में ?

धड़ाम की आवाज़ आयी और सब धूमिल सा लगने लगा । कुछ समझ नहीं  आ रहा था।  थोड़ी देर बाद जब कुछ समझ में आना शुरू हुआ तो  देखा ,  चारों  ओर  भीड़ थी, माँ माथे में त्योरियां डाले  घूर रही थी। हाथ में हल्दी वाला दूध का गिलास थमाकर  पैर पटककर बाहर चली गई ,बाबूजी ने आगे बढ़ थोड़ा ढाढस बंधाया । बोले कोई बात नहीं बेटा  कुछ ज्यादा नहीं कुछ दो चार हड्डी ही टूटी हैं ,जुड़ जाएगी जल्दी ही। .. बस कुछ चंद दिनों की बात है। दर्द से कराहते हुए मैं धीऱे - धीऱे मुस्कराने की कोशिश  करते हुए सोच रही थी की अभी तो माँ की मार भी बाकी  है। 
आंखों में आंसू लिए बाबूजी करीब आकर बोले दिल छोटा मत कर बिटिया, तू तो मेरी बहादुर सिपाही है ,क्या हुआ अगर सफ़ल नहीं हुई। हिम्मत मत हारना संघर्ष करने वालों की कभी हार नहीं होती। आज से सब मेरी बहादुर  बेटी को तितली 🦋के नाम से बुलाएँगे, समझे। ऐसा कहकर उन्होंने ज़ोर  का ठहाका😆 लगाया और मुझे प्यार से अपने गले लगा लिया. ...
तो ये थी मेरी छोटी सी  याद। ...अगर आपके लबों पे इसे पढ़ के थोड़ी सी मुस्कुराहट आयी हो तो मुझे ज़रूर बताइये ताकि में आपको आगे भी ऐसी कहानियाँ  सुना सकूँ. 
धन्यवाद्  .                                                                                














MAIN AUR MERI TANHAI

मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं. .........  वाह -वाह क्या शायरी, क्या कमाल शब्द है, हैं ना ? एक -एक शब्द अपना दर्द बयां ...