Translate

Showing posts with label LIFE. Show all posts
Showing posts with label LIFE. Show all posts

Wednesday, March 25, 2020

YAADON KI ALMARI

                                                                






एक दिन मुझे कपड़ों की तह में  दबी रखी माँ की एक  पुरानी  चिठ्ठी  मिली।  
सोचा क्या करूंगी अब  जब माँ ही नहीं है तो किससे पूछूं ?किस की  चिट्ठी है ?क्या लिखा होगा ? कुछ देर सोचती रही इधर - उधर घूमती रही।  एक मन किया  खोल लूँ , पर दूसरा मन करा रहा था नहीं । सब्र जब टूट गया  बच्चा  मन का रूठ गया।  ज़िद थी मन  कि बस एक बार देख लूँ हो सकता है कुछ मेरे लिए ही लिखा हो। ..ये बात कुछ समझ  में आयी  और फिर आखिर कांपते हाथों से लिफाफा खोल ही दिया। नीले रंग का अंतर्देशीय पत्र काफ़ी फटा - पुराना सा था, स्याही भी हल्की सी धूमिल हो रही थी  मैंने पढ़ना आरंभ किया। 
शीर्षक था :-"बस अब मैं  ऐसी ही हूँ  "



बस अब मैं  ऐसी ही हूँ,कभी अरमान था मेरा भी 
कि बन तितली  उड़ जाऊँ कहीं चमकूँ इस आसमान में
जब मेरे ये पंख नए थे, चमचम करते चमक रहे थे 
माँ बोली जा छिप जा बेटी, नज़र बुरी हैं जहां में
मत उड़ तू आसमान मैं
 मत उड़ आसमान में 

कल्पनाओं की ज़िन्दगी , चाहे जितने सुनहरे सपने सी ले, 
ऐसा कोई लिबास बना ले, जो बुरी नज़र से तुझे बचा ले. 

मैंने बाबा से एक अटैची मंगाई 
सारे सपने, सारी इच्छा रखती गई सम्भाल मैं  
थी बुरी नज़र इस जहान में.... 

ना खोल सकीं संदूक कभी, धीरे धीरे धूल चढ़ गई 
कल्पनाओं की उड़ान में 
थी बुरी नज़र इस जहान में.....
एक दिन सोचा आसमाँ की सैर पे जाऊँ
पंखों को खोल ज़रा अब मैं मुस्कुराऊँ 
पर अब ना सपना बचा ना उम्मीद 

डर से बैठ गयी इतनी कि  उड़ना भी  गई थी भूल 
गर बेटी तू मुझको कभी पढ़ पाए ,कभी यादों के संदूक  जो खुल जाये 

कभी न सपने बंद कर रख देना कहीं 
क्या पता क्या कभी लड़कियों  के लिए कुछ बदलेगा इस जहान  में 

या बुरी नज़र का डर  ऐसे ही सतायेगा
मेरी तरह क्या हर अरमान संदूक से ही निकला जायेगा ?


   



Monday, March 23, 2020

POWER OF POSITIVE THINKING (SAKARATMAK SOCH KE JADUIE PRABHAV )






दोस्तो ,आज का ये विषय आपको  थोड़ा जटिल ज़रूर लगेगा लेकिन जीवन में उन लोगों के अवश्य काम आएगा जो डॉक्टरों के चक्कर लगा -लगा के परेशान हो जाते हैं और समझ नहीं पाते कि उनके साथ ऐसा क्या हुआ है क्यों वो बीमार सा महसूस करते हैँ ?

ये तो आप सब अच्छे से जानते होंगे की हमारे मूड का प्रभाव हमारे शऱीर पर भी पड़ता है पर कितना ?
क्या आप जानते हैं कि  हमेशा ख़राब मूड मैं रहने से हमारा पूरा का पूरा बॉडी सिस्टम लड़खड़ा जाता है।

और जा जाने कितने शारीरिक और मानसिक रोग अपने पैर पसार  लेते हैं।
ख़ैर  मैं आपको  वो सब तो नहीं बता सकती  लेकिन इस समस्या का समाधान जरूर जानती हूँ।
कुछ करीब से देखा है मैंने ऐसे लोगों को जो अपने जीवन से ज़यादा संतुष्ट नहीं थे।

काफी समय तक उनके संपर्क मैं रहने के बाद आज मैं इस निष्कर्ष पर पहुँच कर कुछ चाँद लाइन आपके लिए लिख रही हूँ.
 मेरे कोशिश सिर्फ यही है कि आप इससे कुछ लाभ उठा पाएं और अपने जीवन को और भी  सुन्दर तरीके से जी सकें।

.

संतोष जीवन की वो कस्तूरी मणि है जो है तो आपके अंदर ही पर आप उसे हमेशा बाहर  ढूंढ रहे होते हो.उसी तरह से जैसे  कस्तूरी मृग सारे जंगल मैं उसकी खुशबू को तलाशते हुए  भटकता रहता है सारी  उम्र.

खुशियां जीवन में किस की   मोहताज है ? क्या आपने कभी सोचा है क्यों जीवन के सारे  सुख होते हुए भी आप खुश नहीं दिखाई देते। वो क्या चीज़  है जो आपको परेशां  कर रही होती है, ? तो इसका उत्तर है :-सोच

जीहां आपकी सोच आपके खुशियों का वो दरवाजा है जो संतोष नाम की चाबी से ही खुलता है। 
कहाँ वो डोर टूट गई थी सपनों की ,क्या वो वजह है जो आपको, न सोने दे रही ,न जागने। आपको सिर्फ ढूँढ़ना है दिल की गहराई में जाकर.
दोस्तो हम कुछ ना कुछ अपने भविष्य के सपने देखते हैं , कुछ लोग उन्हें पहचान जाते हैं और पूरा करने में जुट जाते हैं.  

वहीं  कुछ लोग जान ही नहीं पाते कि उनको ज़िंदगी से क्या चाहिए ... 
और बस चल देते हैं बिन अड्रेस मंजिल ढूँढने . 
ऐसा नहीं कि सभी लोग, लेकिन कुछ ख़ास ,वो लोग जो भावुक प्रकृति (emotional) के  होते 
हैं , वो ही गुमशुदा (lost from aim ) कहलाते हैं .
भावुक  होना हमेशा आपके आड़े आता है, क्यूँकि आप सिर्फ "कोई बुरा ना मान जाए " इसी दुविधा में फंसे रहते हो और लोग आपसे अपना "उल्लू  सीधा" करके चलते बनते हैं.







आपकी विचारधारा अगर नकारात्मक है तो आपके शरीर  के पूरे सिस्टम्स को प्रभावित कर देती है.तो अगर आप एक स्वस्थ जीवन की तलाश कर रहे हैं तो   भूलिये  नहीं  की आप भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने बाकि लोग। 
जीवन  में आगे बढ़ना हो तो निराशा की लाठी फेंक दें इससे आप ज़यादा दूर नहीं चल पाएंगे। बस.... 
 अपने सपनो की ज्योत   जलाइए और बिना किसी सहारे का इंतजार किये बस चल पड़िए मंज़िल की ओर। 




अब आप मेरी इस कविता पे  ज़रूर गौर फरमाए  शायद ये भी आपकी कुछ मदद कर पाए। 








                                                                                                                                   
                                                                                           

                                                                                 




MAIN AUR MERI TANHAI

मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं. .........  वाह -वाह क्या शायरी, क्या कमाल शब्द है, हैं ना ? एक -एक शब्द अपना दर्द बयां ...